दोस्ती हो तो ऐसी
अंदरुनी सरोकार, उद्गार, व्यथाएं, हर्षोल्लास व करुणाएं साझा न किए जाएं तो जीवन बोझिल बल्कि असह्य हो सकता है। जिनकी कोई नहीं सुनता, उन्हें अपने कुत्ते या घोड़े से बतिया कर चैन मिलता देखा गया है। पारंपरिक रिश्तों के जरजराने से अब संबंधों का दारोमदार मुख्यतया मित्रों पर है अतः उनका सुविचारित चयन आवश्यक है। […]