Shadows cannot ‘create’, they only humbug

Living in sync with higher powers alone keeps us fit and kicking. That also gives meaning to life. During around 6,57,000 hours of our sojourn on earth (presuming an average life span of 70 years), man harbours a myriad ambitions, weaving a thousand dreams. But he fails to understand that he is but a miniscule, […]

क्या आपको शोरगुल, चिल्ल-पौं सहन नहीं ? भीतर से शांत रहने की जुगतें सीखनी होंगी

जिस-जिस की तलाश में हम इधर उधर भटकते रहते हैं उसे अपने भीतर तलाशें। पर्वतों की सुरम्य चोटियों, किनारों से टकरा कर चूर-चूर होती, छितरती समुद्री झागदार लहरों या सुनहरे रेगिस्तान की मनोहारी छटाओं से अभिभूत पर्यटक लौट कर बताते हैं कि उन पलों से मिलती शांति को किन्हीं भी शब्दों में बखान करना संभव […]

Don’t fear the edge, it’s hallmark of creativity

Boundaries and limitations are anathema to creative souls, who reflexively seek new horizons. A comfort zone is cosy, and tension-free. It allows no experimentation or innovation nor permits taking the road less travelled. The inmates of comfort zone shall take minimal or no risk. No scope for venting out core issues. Fear is reflexive to […]

देव उठनी एकादशी – विश्राम के बाद पुनः नई ऊर्जा से कर्मठता का संदेश

हिंदू कैलेंडर (पंचांग) का आधार अंतरिक्ष में चंद्रमा और सूर्य की गति है। एकादश का शाब्दिक अर्थ है ग्यारह (1+10) एकादशी प्रति माह दो बार पड़ती है; सभी एकादशियों में सर्वाधिक महत्व कार्तिक के शुक्ल पक्ष की एकादशी का है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु क्षीर सागर में चार माह (चतुर्मास) की गहन […]

सत्य क्या है, अंधकार या प्रकाश ?

क्या यह सत्य है कि प्रकाश जीवनदाई है? हम किसी गफलत में तो समूची जिंदगी नहीं गुजार देते? समूची दुनिया की संरचना द्विपक्षीय हैः फरिश्ता/हैवान, सुख/दुख, दिन/रात, जय/पराजय, अग्नि/जल, लाभ/हानि, नरम/सख्त, आशा/नैराश्य, जीवन/मृत्यु। इसी भांति प्रकाश और अंधकार हैं। ‘प्रकाश’ का साहचर्य ज्ञान, प्रेम, जागरूकता, सकारात्मकता, समृद्धि, उदारता, संपन्नता, पारदर्शिता और सद्बुद्धि से, तो दूसरी […]

क्या भूलूं, क्या याद रखूं

आपके बस में सब कुछ नहीं किंतु बहुत कुछ है! जीवन में जो कुछ घटित होता है उसमें से क्या-क्या याद रखा जाए, और किन बातों को भूल जाने में भलाई है, इसका गहन विचार आवश्यक है। व्यक्ति का मन और चित्त आजीवन तरह-तरह के कार्यकलापों और उनसे जुड़ी उधेड़बुनों में जकड़ा रहता है। मनोवैज्ञानिक […]

साथी नहीं, असल दोस्त चाहिएं जीने के लिए

  दोस्त कभी बोझ नहीं होता, उसके होते बोझ घट जाता है। राम, बलराम और बड़थ्वाल: राम और बलराम दोनों ने, भोपाल के उसी ऑफिस के तीसरे मित्र को, करीब 630 कि.मी. दूर रायपुर में सेवारत उसके भाई के बाबत टेलीग्राम थमाया। लिखा थाः ‘‘बृजेश कुमार डी.के. अस्पताल रायपुर में गंभीर हालत में भरती। तुरंत […]

कौन कहता है, प्रार्थना सुनी नहीं जाती?

प्रार्थना 100 प्रतिशत मनोयोग से संपन्न की जाए तो फल अवश्य मिलेगा ईश्वरीय तथा उच्चतर, परालौकिक शक्तियों का अस्तित्व कमोबेश सभी स्वीकार करते हैं। तथापि एक वर्ग इन शक्तियों पर प्रश्न उठाने वालों का भी है। दोनों कोटि के व्यक्ति कठिन, पीड़ादाई या असमंजस के पलों में प्रार्थना का सहारा अवश्य लेते हैं, और प्रार्थना […]

एक पुण्यात्मा की सद्गति

नेकी और भक्तिभाव से अभिप्रेरित शख्सियत से ऐसा बहुत कुछ सीख सकते हैं जो हमें सुराह पर रखेगा। उनत्तीस जून 29 जून 2025, रविवार अर्धरात्रि को हमारी चाचीजी श्रीमती हीमादेवी बड़थ्वाल, करीब 85 वर्ष की आयु में, दुनिया से चल बसीं। इन दिनों वे दिल्ली एनसीआर में निवासरत अपने छोटे (सेवानिवृत्त) पुत्र के साथ थीं। […]

परिवार से जुड़े रहेंगे तो पटरी से उतरने की नौबत नहीं आएगी

परिवार से जुड़े लोगों में जो मेलजोल, सौहार्द, आत्मविश्वास और हौसले होते हैं वे टूटे परिवार से निकले लोगों में कहां? जिन लोगों से आपका उठना-बैठना, लेन-देन और मेलजोल रहता है, वे आपके आचरण, व्यवहार और चाल-चलन के बारे में बहुत कुछ जानते हैं, आपके हावभाव पढ़ लेते हैं। उन्हें यह भी पता होता कि […]

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