धन, वस्तु या धन की सार्थकता तभी तक है जब तक वह प्रवाहित होता रहेगा
प्रवाह प्रकृति का आधाभूत नियम है। प्रवाह – ऊंचाई से निचले स्तर की ओर, बहुतायत से अभाव की ओर, सघनता से विरलता की ओर स्वाभाविक है। इस नियम की अनदेखी से व्यक्ति झमेलों में गिरेगा। अनेक उम्रदारों द्वारा सहेज-सहेज कर दशकों तक संचित उस धन को व्यर्थ समझा जाए जो अंत में न स्वयं उनके, […]
श्राद्ध और कृतज्ञता भाव
हिंदुओं द्वारा प्रतिवर्ष मनाए जाते श्राद्ध इस वर्ष (2024 में ) 2 अक्टूबर, मंगलवार को पूर्ण हो रहे हैं । श्राद्धकर्म से जहां पितर तृप्त होते हैं वहीं हम धन्य होते हैं। मान्यता है कि इस दिन वे सभी पितरों को श्राद्ध दे सकते हैं जिन्हें अपने दिवंगत करीबियों की पुण्य तिथि ज्ञात नहीं है। […]
ज्ञान हासिल करने और बांटने से ज्यादा अहम उसे आचरण में ढ़ालना है
परिजनों, साथियों तथा अन्य सहजीवियों से मेलजोल तथा प्रेम बनाए रखने पर व्याख्यान देने वाले जितने धर्मगुरु, कथावाचक, बाबा और फकीर मिलेंगे उन्हें सुनने को बेताब भक्त उनसे हजारों गुना मिल जाएंगे। ये सार्वजनिक मंचों से चेतन, अवचेतन पर गोलीबारी करते हुए ज्ञान बांटने वालों से अलहदा एक वर्ग उनका है जो निजी दायरों में […]
पोषण से कहीं ज्यादा सांसों पर है सेहत का दारोमदार, जी हां! इनकी फिक्र करें
कोविड से निबटने के लिए पिछले कुछ महीनों तक ऑक्सीजन के लिए मचे हाहाकार का बड़ा संदेश है कि जीवन पंचतत्वों में एक वायु के प्रति अपनी दृष्टि में सुधार करें। साधु वृत्ति के अपने एक संबंधी थे, 93 वर्ष की आयु में, 2008 में चल बसे थे। आखिरी दिनों तक ओजस्वी, एकदम स्वस्थ, जिंदादिल, […]
आपका कहा-लिखा दूसरों के सर-आंखों पर रह सकता है बशर्ते …
चुनावी बयानबाजियों, बाजार में बिक्री बढ़ाने और रोजमर्रा की जिंदगी में अपना उल्लू साधने के लिए अमूनन शब्दों की जादूगरी का जम कर इस्तेमाल होता है। शब्द ऊर्जा है, इनका प्रयोग जितना सोच विचार कर करेंगे उतना ही वे वजनदार होंगे और आपकी शख्सियत में चार चांद लगाएंगे। शब्दों की उत्पत्ति दैविक, और इनका स्वरूप […]
शांत, संतुलित रहें किंतु कदाचित प्रचंड प्रतिरोध भी नितांत आवश्यक होता है
दुनिया के सुख मेल में हैं, टकराने में नहीं। तो भी दूसरे को जताना आवश्यक है कि आप मूर्ख नहीं हैं। जीवन का सुख सुलह में है, भिड़ंत में नहीं। जीवन उसी अनुपात में शांतिदाई, सहज, आनंदमय और सार्थक होगा जितना इसमें प्रेम और सौहार्द का समावेश होगा। प्रतिरोध, टकराव, आक्रोश और प्रतिशोध के भाव […]
प्रसन्न रहना सरल है, बड़प्पन सरल आचरण अपनाने में है
मनुष्य की चहुमुखी संवृद्धि और सफलता की चाहत को भांपते हुए अनेक धर्मगुरु तथा मोटीवेटर ‘प्रसन्नता’ को प्रभावी उपाय बतौर प्रस्तुत करते हैं। कुछ आध्यात्मिक गुरु विभिन्न स्तरों पर हंसने के नियमित सत्र आयोजित करते हैं। इस दौरान प्रतिभागियों से 15-20 मिनट या अधिक अवधि तक हंसी का सामूहिक अभ्यास कराया जाता है। स्वाभाविक है, […]
संतान से अनावश्यक मोह कष्टकारी होगा
संतान की परवरिश कर्तव्यभाव से करें, प्रतिफल की आस रहेगी तो जीवन बोझिल हो जाएगा। कार्यस्थल में जिस कुर्सी पर हम बरसों बैठते रहे, घर में जिस बिस्तर पर सोए, जिस थाली में भोजन ग्रहण करते रहे, पार्क की जिस बेंच पर अक्सर बैठे, या जिस वृक्ष या पालतू जानवर पर प्रतिदिन दृष्टि जाती रही, […]
इंसान के खुशनुमा जीवन की बढ़िया कुंजी बनती है शुक्रगुजारी
जिस मुकाम पर आप आज हैं, वहां पहुंचने में सैकड़ों जाने-अनजाने व्यक्तियों, संगठनों का हाथ रहा है। यदि आप इनके प्रति शुक्रिया महसूस करने की आदत बनाते हैं तो आपकी जिदंगी स्वस्थ व खुशनुमा गुजरेगी। जो लोग जीवन को तोहफा मानते हैं, वे मन, शरीर व भावना से अधिक स्वस्थ रहते हैं। फिर भी […]
जहां खड़े हैं वहां हैं संभावनों के अंबार
नव वर्ष या सांस्कृतिक उत्सवों की रंगरेलियां आपको कितना रास आती हैं, यह आपकी मनोदशा पर निर्भर करता है। संभव है आपके अपने भीतर एक अधूरापन सालता रहे। यदाकदा आनंद-विभोर होने के लिए सायास जतन नहीं किए जाएं तो जिंदगी नीरस, उकताऊ और जड़ हो सकती है। जीवंत रहने और प्रगति के लिए उमंग और […]
मोदी सरीखों पर नहीं लागू होते दुनियादारी के नियम
‘‘मोदी सरीखों’’ से मेरा आशय नेताई बिरादर से नहीं बल्कि उस खास मिजाज की बिरादर से है जिनके उठने-जगने, खानपान, लेनदेन, व्यवहार और सोच के अंदाज मूलतया आम जन के तौरतरीकों से जुदा होता है। उनके अंदुरुनी सरोकार और मंसूबे लोगों के पल्ले सहज नहीं पड़ते। यह भी कह सकते हैं जिस अलहदा माटी की […]
सायास, मनोयोग से किए कार्यों से ही उत्कृष्ट, वांछित परिणाम मिलेंगे
अपने आवास या कार्यस्थल के गिर्द भूमि को उजाड़ छोड़ देने से उसमें खरपतवार और अवांछित झाड़-झंकार स्वतः पैदा हो जाएंगे। मनचाही, बेहतरीन उपज चाहिए तो भूमि की समुचित तैयारी के बाद अच्छे बीज डालने होंगे, समय-समय पर खाद, सिंचाई और कीटनाशक का प्रयोग करना होगा। बीच-बीच में मुख्य फसल का पोषण हड़पने वाले अनावश्यक […]
