अतीत में न जकड़े रहें, आपको भविष्य में जीना है
‘‘अब न रहे वे पीने वाले, अब न रही वह मधुशाला’’। लोकप्रिय कवि हरिवंश राय बच्चन की इस पंक्ति में दो इशारे हैं। पहला इस सोच पर तिरछी नजर है कि गया जमाना हर मायने में आज के जमाने से बेहतर था। दूसरा अहंकार पर व्यंग्य है – कोई था तो हम थे, किसी का […]
