स्वदेशी भाषाओं के संवर्धन का अर्थ विदेशी भाषाओं का तिरस्कार नहीं है
निजी भाषा को भरपूर व्यवहार में लाना व्यक्ति और समाज के चहुमुखी विकास के लिए अनिवार्य है। भारत में प्रचलित 1600 भाषाओं में से अधिकांश की समृद्ध मौखिक या/और लिखित परंपराएं हैं, ये सभी जीवंतता व विविधता से परिपूर्ण हैं। इन स्थानीय भाषाओं ने सदियों तक लोकजीवन में प्राण संचारित करते हुए जनमानस को उद्वेलित, आह्लादित, […]
