आपके बस में सब कुछ नहीं किंतु बहुत कुछ है! जीवन में जो कुछ घटित होता है उसमें से क्या-क्या याद रखा जाए, और किन बातों को भूल जाने में भलाई है, इसका गहन विचार आवश्यक है।
व्यक्ति का मन और चित्त आजीवन तरह-तरह के कार्यकलापों और उनसे जुड़ी उधेड़बुनों में जकड़ा रहता है। मनोवैज्ञानिक बताते हैं, व्यक्ति के मन में रोजाना करीब 62 हजार विचार आते-जाते हैं। ये विचार सुखद, दुखद, कचोटने वाले, राहत पहुंचाने वाले, और कुछ खतरनाक भी हो सकते हैं।
स्मृतियों की विलुप्तमान प्रवृत्ति: हम कितने भी सयाने, तीक्ष्णबुद्धि या साधन संपन्न हों, विचारों तथा भावों के संग्रहण और विष्लेण की हमारी क्षमताएं असीम नहीं हैं। अतः प्रकृति ने मनुष्य को इस प्रकार निर्मित किया कि कालांतर में हमारी स्मृतियां तेजी से विलुप्त होती रहें। एक चिंतक ने कहा, विस्मृति, यानी भूल जाने की सामर्थ्य पृथ्वी में एकमात्र अस्मिता है जिसकी गति विचार की गति से तीव्र है।
अतीत की भारी हानि, भयावह परिस्थिति, स्वयं का या स्वजन का अंग भंग, प्रियजन की मृत्यु या हृदय-विदारक घटनाएं मस्तिष्क से निष्कासित नहीं की जाएंगी तो खानपान, निद्रा तथा दैनंदिन कार्य बाधित हो जाएंगे। मन और चित्त असंतुलित रहने लगेंगे, फिर हम दूसरों पर ही नहीं, स्वयं पर भी बोझ बन जाएंगे।
विस्मृति दोष नहीं, वरदान है। यह हमें अतीत के अवांछित, अप्रिय प्रसंगों से विमुक्त कर वर्तमान में जीना सिखाती है ताकि पूर्णता से जीने के लिए आवश्यक उत्साह व उल्लास बना क्षीण न हो।
अच्छी स्मृति के लाभ: अच्छी स्मृति व्यक्तित्व में चार चांद लगा देती है। आवश्यक जानकारी याद रहेगी तो जरूरत पड़ने पर काम आएगी, यह व्यक्ति को अधिक परिपूर्ण बनाने में सहायक रहती है। स्मृति सशक्त होगी तभी अर्जित ज्ञान, कौशल, सूझबूझ और अनुभव को संरक्षित और संवर्धित कर सकते हैं। आरंभिक चरणों में पढ़ी-सीखी मूल जानकारी और अवधारणाएं स्मरण नहीं रहेंगी तो शिक्षार्थी का उच्चतर स्तर तक पहुंचना दुष्कर होगा। स्मृतियां हमें अतीत से जोड़ती हैं। इन्हें साझा किया जाना चाहिए। हेलेन केलर ने कहा, जब तक आप आत्मीय, प्रियजनों की स्मृतियों दिल में संजोए रखेंगे, आपका जीवन खुशनुमां गुजरेगा।
स्मृति का नियम है कि जिन विषयों में अभिरुचि होगी, वे मनस्पटल में सहजता से अंकित हो जाएंगे। अभिरुचि जितनी गहन होगी, उतनी देर तक कर टिकी रहेगी। किन वर्षों में फलां शेयर की कीमत बुलंदी पर थी या किस क्रिकेटर ने सबसे ज्यादा छक्के कब लगाए, कुछ लोग तुरंत बता देगें। ऑफिस में उस व्यक्ति की बहुत पूछ होती है जिसे मालूम होता है फलां ऑर्डर किस फाइल में है और वह फाइल कहां होनी चाहिएं।
किन विचारों, अनुभवों, धारणाओं, मान्यताओं और व्यक्तियों को सहेजना और संरक्षित रखना है तथा किन्हें मन-चित्त में सायास स्थान नहीं देना, इसका विचार और अभ्यास सुचारु, अर्थपूर्ण जीवन की आधारशिला है। उस रिश्तेदार ने सरेआम जैसे मेरा अपमान किया, बॉस ने जिस तरह झिड़का, पड़ोसी ने जैसा कुत्सित व्यवहार किया, ऐसे प्रसंगों को दिल में ठूंसे रहेंगे तो अपना चैन खो देंगे। उन हाथों को कदाचित न भूलें जिन्होंने आपको पोसा, और सदा कुछ दिया ही है।
आयु बढ़ने पर स्मृति में किंचित ह्रास को स्वीकार करें, जितना स्मरण रहे उसी में संतुष्ट रहने की आदत डालें। प्रतिदिन कुछ नया जानने, सीखने की प्रवृत्ति याददाश्त को कुंद नहीं होने देगी। बेहतर होगा, आवश्यक तथ्यों, नजदीकी संबंधियों और उनके बच्चों के नाम डायरी में दर्ज कर लें। अच्छे पलों को मोबाइल में नहीं, दिल में संजोए रखें।
तनाव, अनिद्रा, दवाओं के सेवन या व्यसन की अवस्था में स्मृति का क्षरण हो सकता है, ऐसा बारंबार या बड़े पैमाने पर हो तभी उपचार के लिए आगे बढ़ें। शारीरिक व बौद्धिक सक्रियता, उचित खानपान, सकारात्मक सोच और व्यसनों पर नियंत्रण से स्मरण शक्ति को चिरकाल तक जीवंत रख सकते हैं।
कितना अद्भुद है, जो हम भूल गए थे, उसका स्मरण जीवन को महका देता है।
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इस आलेख का संक्षिप्त स्वरूप 24 अगस्त 2025, रविवार के दैनिक जागरण (संपादकीय पेज, ऊर्जा कॉलम) में ‘स्मृति – विस्मृति’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ।
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अत्यंत शिक्षाप्रद, विचारणीय और रोचक विषय है। जीवन को सुगम, सरल व सहज करने के लिए इसका अनुपालन अनिवार्य है।
अद्भुत लेख।
विस्मृति भूलने में और स्मृति याद रहने के फायदे और नुकसान के सम्बन्ध में उपरोक्त लेख प्रशंसनीय और जीवनोपयोगी है, लेखक को धन्यवाद।
“ज़िंदगी की खूबसूरत स्मृतियाँ सन्तुष्ट जीवन और सुखमय ज़िंदगी का आधार होती हैं।**जीवन अविस्मरणीय क्षणों का संग्रह है।**कृतज्ञता यादों को खज़ाने में बदल देती है।**खूबसूरत और अविस्मरणीय स्मृतियाँ हमेशा हमें जीवन में नई ऊर्जा का सृजन करने और ऊँचाइयों तक पहुँचाने में मदद करती हैं।**दुःखद स्मृतियों को भुला देना ही बेहतर होता है।”**
सटीक चित्रण है। जीवनभर अनेकानेक स्मृतियां आती हैं और जाती रहती हैं। कुछेक होती हैं कि भुलाए नहीं भूलती। रह-रह कर ये सदा आपको कचोटती रहती हैं।